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गंभीर श्रेणी में पहुंचा दिल्ली का वायु प्रदूषण, ग्रैप 4 हुआ लागू, जानें ग्रैप स्टेज-IV में क्या-क्या हैं पाबंदियां

गंभीर श्रेणी में पहुंचा दिल्ली का वायु प्रदूषण, ग्रैप 4 हुआ लागू, जानें ग्रैप स्टेज-IV में क्या-क्या हैं पाबंदिया।दिल्ली की हवा एक बार फिर बेहद खराब स्थिति में पहुंच गई है। शनिवार को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) तेज़ी से बढ़ गया, जिसके बाद दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) का चौथा चरण लागू कर दिया गया। रात आठ बजे दिल्ली का औसत AQI 428 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बताया कि प्रदूषण को और बढ़ने से रोकने के लिए यह फैसला तुरंत प्रभाव से लिया गया है। खराब मौसम, हवा के न चलने और प्रदूषकों के वातावरण में फंसे रहने के कारण हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार शाम चार बजे ही AQI 400 तक पहुंच गया था, जिसे देखते हुए एहतियात के तौर पर स्टेज-IV की पाबंदियां लागू की गईं। ये पाबंदियां पहले से चल रहे ग्रैप के स्टेज-I, II और III के अलावा होंगी।

रविवार को स्थिति और चिंताजनक हो गई। दिल्ली के आनंद विहार इलाके में AQI 493 रिकॉर्ड किया गया, जो बेहद गंभीर स्तर माना जाता है। रोहिणी में यह 488, वज़ीरपुर में 483 और बवाना में 478 दर्ज किया गया। द्वारका सेक्टर-8 और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जैसे इलाकों में भी AQI 470 से ऊपर रहा। चांदनी चौक में प्रदूषण का स्तर 466 तक पहुंच गया, जबकि नज़फ़गढ़ में AQI 307 रहा, जो तुलनात्मक रूप से कम होने के बावजूद सेहत के लिए नुकसानदेह है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड और कोहरे ने हालात को और खराब कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार सुबह दिल्ली के कई हिस्सों में हल्का से घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता कम हो गई। दिन में आंशिक रूप से बादल रहने की संभावना है। न्यूनतम तापमान चार से छह डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जो सामान्य से कम है, जबकि अधिकतम तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है।

जानिए ग्रैप 4 में क्या-क्या पाबंदियां हैं?

ग्रैप स्टेज-IV वायु प्रदूषण नियंत्रण का सबसे सख्त स्तर होता है, जो तब लागू किया जाता है जब AQI ‘Severe+’ श्रेणी में पहुंच जाता है। इसमें स्टेज-I, II और III की सभी पाबंदियों के साथ आपात कदम भी लागू किए जाते हैं। इसके तहत गैर-जरूरी निर्माण कार्य रोकने, डीज़ल वाहनों पर रोक, उद्योगों की गतिविधियाँ सीमित करने और दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम करने की सलाह दी जाती है। हालात न सुधरने पर गैर-जरूरी व्यावसायिक गतिविधियाँ बंद करने पर भी विचार किया जाता है।

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