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अलका लंबादी की मांग– सामने आए नए तथ्यों और बयानों के आधार पर मामले की दोबारा जांच हो

‘हाथरस 16 डेज’ डॉक्यूमेंट्री ने खोली सिस्टम की पोल, सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को बचाने में शामिल थी भाजपा सरकार- महिला कांग्रेस  ‘साक्ष्यों को नष्ट करने और लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन एसपी, डीएम व पुलिसकर्मियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो’

नई दिल्ली, 21 मई

कांग्रेस ने कहा है कि वर्ष 2020 में हुए उत्तर प्रदेश के चर्चित हाथरस सामूहिक दुष्कर्म मामले पर बनी नई क्राइम डॉक्यूमेंट्री ‘हाथरस 16 डेज’ से यह स्पष्ट होता है कि दोषियों को बचाने में भाजपा सरकार और पूरा सरकारी तंत्र शामिल था।

नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने मांग की कि डॉक्यूमेंट्री में सामने आए नए तथ्यों और बयानों के आधार पर मामले की दोबारा से जांच की जाए। साक्ष्यों को नष्ट करने और लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन एसपी, डीएम व पुलिसकर्मियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

डॉक्यूमेंट्री के कुछ मुख्य अंश और वीडियो साक्ष्यों को दिखाते हुए अलका लांबा ने कहा कि इस मामले में पूरा सिस्टम शामिल था, ताकि दलित पीड़िता को न्याय न मिल सके।

डॉक्यूमेंट्री में दिखाए गए स्त्री रोग विशेषज्ञ के बयान का जिक्र करते हुए लांबा ने कहा कि डॉक्टर खुद स्वीकार कर रही हैं कि पीड़िता को अस्पताल लाने से पहले ही सबूतों को नष्ट करने के उद्देश्य से उसे नहला-धुलाकर साफ कर दिया गया था। इसके बावजूद डॉक्टर को पूरा विश्वास था कि जांच में सच सामने आएगा। लांबा ने कहा कि बच्ची ने मरने से पहले यह बयान दिया था कि उसके साथ गलत हुआ है, लेकिन उसके बयान को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों को बचाने में सरकार और पुलिस ने पूरी मदद की; बच्ची के साथ अपराध होने के आठ दिन बाद सबूत जुटाए गए और कपड़ों समेत जरूरी साक्ष्य समय पर एकत्र नहीं किए गए। कई महत्वपूर्ण साक्ष्य अदालत में पेश नहीं किए गए, जो आरोपियों को फांसी के तख्ते तक पहुंचा सकते थे।

लांबा ने कहा कि पुलिस द्वारा केस को कमजोर किया गया। परिणामस्वरूप दो मार्च 2023 को अदालत ने चार आरोपियों में से तीन को बरी कर दिया।

अलका लांबा ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में साफ दिखाया गया है कि बच्ची की स्पाइनल कॉर्ड टूट चुकी थी, उसे गले में दुपट्टा डालकर बुरी तरह घसीटा गया था। उसे एंबुलेंस और स्ट्रेचर भी नहीं दिया गया।

लांबा ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार के कैमरे पर दिए गए बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पूर्व एडीजी खुद मान रहे हैं कि पुलिस ने मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई, अगर सबूतों को समय पर इकट्ठा किया होता तो अपराधियों को सजा मिल सकती थी। इसी चूक का फायदा आरोपियों को मिला और वे रिहा कर दिए गए। उन्होंने कहा कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें सिर्फ सस्पेंड कर बाद में दूसरी जगह तैनात कर दिया गया।

लांबा ने सवाल उठाया कि किसके इशारे पर या दबाव में एसपी, डीएम जैसे आला अधिकारियों की मौजूदगी में आधी रात को पुलिस और प्रशासन ने बिना परिवार की सहमति के पीड़िता के शव को जला दिया और सबूतों को नष्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार को बंदी बना लिया गया था और उसे अंतिम बार बच्ची का चेहरा तक देखने नहीं दिया गया।

महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने याद दिलाया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने जब एक अक्टूबर 2020 को पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश की थी, तो उन्हें डीएनडी फ्लाईओवर पर ही हिरासत में ले लिया गया था। उन्होंने आगे कहा कि अगर इन दोनों नेताओं को उस समय न्याय के लिए पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने से न रोका गया होता, तो आज अपराधी इस तरह आज़ाद नहीं घूम रहे होते।



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