दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के साथ बढ़ रहे उत्पीड़न को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाएगी कांग्रेस
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
इमरान प्रतापगढ़ी और राजेंद्र पाल गौतम बोले- अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक विभाग मिलकर लड़ेंगे जमीनी लड़ाई, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में होंगे कार्यक्रम
नई दिल्ली, 06 जून
देशभर में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के साथ बढ़ रहे उत्पीड़न को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ देशव्यापी अभियान का शंखनाद करते हुए आगामी 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। शनिवार को नई दिल्ली में कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग और अल्पसंख्यक विभाग के संयुक्त अधिवेशन में यह फैसला लिया गया।
अधिवेशन के उपरांत कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन इमरान प्रतापगढ़ी और अनुसूचित जाति विभाग के चेयरमैन राजेंद्र पाल गौतम ने मोदी सरकार की नीतियों और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए।
इमरान प्रतापगढ़ी और राजेंद्र पाल गौतम ने बताया कि संयुक्त अधिवेशन में फैसला लिया गया है कि भाजपा सरकार के शासन में दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ रहे अत्याचार के खिलाफ दोनों विभाग मिलकर देश भर में अभियान चलाएंगे। इसके तहत आगामी 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस विरोध-प्रदर्शन में देश भर से दलित और अल्पसंख्यक समाज के सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।
उन्होंने आगे बताया कि इस अभियान के तहत जून के तीसरे सप्ताह में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दोनों विभागों की राष्ट्रीय और राज्य सलाहकार परिषद का एक संयुक्त कार्यक्रम होगा। इसके बाद देश के अन्य राज्यों में यह कार्यक्रम चलाया जाएगा और इसे जिला व ब्लॉक स्तर तक भी ले जाया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश में जहां भी वंचितों के उत्पीड़न का मामला सामने आएगा, दोनों विभागों के पदाधिकारी संयुक्त रूप से पीड़ितों के साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पीड़ितों को कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक मदद दी जाएगी।
इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य है कि समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के मन में यह विश्वास बना रहे कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के संविधान में सभी को न्याय व समान अधिकार मिलता है।
राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि देश में दलित, आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्गों के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप की आय सीमा महज ढाई लाख रुपये तय की गई है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए यह सीमा आठ लाख रुपये सालाना है। उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से पक्षपात करार देते हुए कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम जैसी संस्थाओं को न तो पर्याप्त बजट मिलता है और न ही इनसे ऋण लेने की शर्तें आसान हैं, जिसके कारण गरीब इनका लाभ नहीं ले पाते।
गौतम ने बताया कि इन मुद्दों को लेकर अल्पसंख्यक विभाग और अनुसूचित जाति विभाग के साथ आदिवासी विभाग, ओबीसी विभाग, अति पिछड़ों और देश के सामान्य वर्ग के गरीबों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि इन वर्गों की आवाज को कोई अनसुना न कर सके।