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भारत की विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का राष्ट्रीय उत्सव ‘विविधा 2026’ का भव्य शुभारंभ, श्रीराम सेंटर से NSD तक गूंजा भारतीय संस्कृति का स्वर

कला मंडली संस्था के पांच दिवसीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव में देशभर के कलाकारों ने प्रस्तुत की भारतीय कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की अनुपम छटा

नई दिल्ली | रिपोर्ट: सना खान, दिल्ली ब्यूरो चीफ

( लोकतंत्र की शान ) हिंदी द डेली न्यूज़पेपर | LKSTV

नई दिल्ली के सांस्कृतिक केंद्र मंडी हाउस में 15 जुलाई से 19 जुलाई 2026 तक आयोजित राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव “विविधा 2026” भारतीय संस्कृति, कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच का एक भव्य संगम बनकर सामने आया। कला मंडली संस्था द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय उत्सव का उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं, लोककलाओं और शास्त्रीय विधाओं को एक मंच पर लाना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन 15 जुलाई को श्रीराम सेंटर, मंडी हाउस में हुआ, जबकि 17, 18 और 19 जुलाई के कार्यक्रम राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के सममुख सभागार में आयोजित किए गए। 16 जुलाई को कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं था। इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों, संगीतज्ञों और कला प्रेमियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

कार्यक्रम में कथक, भरतनाट्यम, मोहिनीयट्टम, शास्त्रीय संगीत, ध्रुपद, लोकगीत, लोकनृत्य, नाटक, सूफी संगीत, ग़ज़ल, भोजपुरी लोकगायन, विचार गोष्ठियों और पुस्तक विमोचन जैसे अनेक आयामों ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया।


श्रीराम सेंटर में हुआ भव्य उद्घाटन

15 जुलाई की शाम चार बजे श्रीराम सेंटर, दिल्ली में कार्यक्रम का शुभारंभ “हम भारत के लोग” तथा वंदना (कथक) की मनमोहक प्रस्तुति से हुआ। इस प्रस्तुति का नेतृत्व आर्यव आनंद और कला मंडली के कलाकारों ने किया। उद्घाटन प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति और संविधान की मूल भावना को कलात्मक रूप में मंच पर प्रस्तुत किया।

शाम पांच बजे उद्घाटन एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर कला, साहित्य और संस्कृति से जुड़े अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। समारोह में अतिथियों का स्वागत करते हुए कला मंडली संस्था की टीम ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के अपने संकल्प को दोहराया।

इसके बाद शाम छह बजे “द्रौपदीगाथा” की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। इस प्रस्तुति का निर्देशन एवं मंचन डॉ. संध्या शर्मा और प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में हुआ। इसमें सुरभि आर्ट्स (हिसार) तथा कला मंडली, दिल्ली के कलाकारों ने भाग लिया। महाभारत की इस सशक्त कथा को आधुनिक रंगमंचीय शैली में प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।

शाम सात बजे “कीचकवध” नाटक का मंचन सुमन कुमार एवं कला मंडली, दिल्ली द्वारा किया गया। कलाकारों के सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवाद, मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था ने दर्शकों को पूरे समय बांधे रखा। कार्यक्रम के पहले दिन बड़ी संख्या में कला प्रेमियों ने उपस्थिति दर्ज कराई।


17 जुलाई : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में रंगमंच और लोककला का संगम

17 जुलाई को कार्यक्रम का दूसरा चरण राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के सममुख सभागार में प्रारंभ हुआ। सुबह 11 बजे उद्घाटन के साथ दिनभर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

सबसे पहले प्रसिद्ध नाटक “इस शहर जिसे कहते हैं दिल्ली में एक दरवेश रहता था” का मंचन डॉ. रमा यादव एवं शून्य थिएटर ग्रुप, दिल्ली द्वारा किया गया। इसके बाद “और एक सच” नाटक की प्रस्तुति काजल सूरी एवं रूबरू, दिल्ली की टीम ने दी। दोनों प्रस्तुतियों में सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा गया।

इस अवसर पर प्रसिद्ध कथक कलाकार कामिनी शर्मा और डॉ. रमा दास ने कथक का व्याख्यान एवं प्रदर्शन प्रस्तुत किया। दर्शकों को कथक की परंपरा, तकनीक और अभिव्यक्ति के विभिन्न आयामों से परिचित कराया गया।

कार्यक्रम में “कला में पुरुष” विषय पर आयोजित विशेष परिचर्चा में पंकज कुमार, सुमन चौधरी, डॉ. प्रकाश झा, सदानंद विश्वास, हिममत सिंह नेगी, डॉ. राजकुमार तथा जितेंद्र सिंह जामवाल ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने भारतीय कला में पुरुष कलाकारों के योगदान, बदलते सामाजिक परिवेश और समकालीन कला की चुनौतियों पर चर्चा की।

इसके बाद सुगम सिंह शेखावत एवं दल ने चंगोपांग लोक अभिव्यक्ति की प्रस्तुति देकर राजस्थान की लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। कथक नृत्य संरचना की प्रस्तुति संगीता श्रीवास्तव ने दी।

पंजाब के मनका ग्रुप, संगरूर ने लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। वहीं पंडित उमाशंकर के संगीत समूह ने “वंदे मातरम्” की संगीतमय प्रस्तुति देकर पूरे सभागार को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया।

शास्त्रीय संगीत की श्रृंखला में डॉ. पं. प्रभाकर नारायण पाठक ने ध्रुपद गायन प्रस्तुत किया। इसके बाद डॉ. पं. आशिष कुमार ने अपनी शास्त्रीय गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

लोकसंगीत की प्रस्तुतियों में हरिशंकर प्रसाद सिंह ने बिहार के लोकगीत, प्रतिमा मिश्रा ने अवधी संस्कार गीत तथा जयंती वर्मा (प्रयागराज) ने “नकटा” लोक शैली की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों ने भारत की विविध लोक परंपराओं को एक मंच पर जीवंत कर दिया।


18 जुलाई: शास्त्रीय संगीत, मोहिनीयट्टम और ‘कला में स्त्री’ पर विमर्श

18 जुलाई को कार्यक्रम की शुरुआत रजित प्रतिबिंब के शास्त्रीय गायन तथा कुशाग्र प्रतिबिंब के बांसुरी वादन से हुई। इसके बाद प्रसिद्ध नृत्यांगना अस्मिता बाबूराज ने मोहिनीयट्टम की मनोहारी प्रस्तुति दी।

कला मंडली ने कथक एवं लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि राजस्थान के गफूरुद्दीन मेवाती ने भपंग गायन एवं चिकारी सितार वादन से दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की।

इस दिन आयोजित विशेष परिचर्चा “कला में स्त्री – एक विमर्श” में श्रुति सिन्हा, रेणु कुमारी, डॉ. कविता ठाकुर, शाहीन शेख और डॉ. स्मिता पाराशर ने कला के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका, चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार रखे।


19 जुलाई: विविधा 2026 का भव्य समापन, कला, संस्कृति और साहित्य के नाम रहा अंतिम दिन

 

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के सममुख सभागार में 19 जुलाई 2026 को विविधा 2026 का अंतिम दिन भारतीय कला और संस्कृति के विविध रंगों का साक्षी बना। सुबह से लेकर देर शाम तक संगीत, नृत्य, साहित्य, पुस्तक विमोचन और विचार-विमर्श के साथ आयोजित कार्यक्रमों ने दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया।

कार्यक्रम की शुरुआत योगानंद संगीत की प्रस्तुति से हुई, जिसने पूरे सभागार में आध्यात्मिक और सांगीतिक वातावरण का निर्माण किया। इसके बाद प्रसिद्ध कथक कलाकारों द्वारा कथक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। कलाकारों की लय, ताल, भाव और अभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।

समापन दिवस का एक विशेष आकर्षण पुस्तक विमोचन समारोह रहा, जिसमें साहित्य और संस्कृति से जुड़े रचनात्मक कार्यों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसकी विरासत पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इसके बाद आयोजित विशेष परिचर्चा “कला में स्त्री” ने कार्यक्रम को एक गंभीर वैचारिक आयाम प्रदान किया। इस संवाद में विभिन्न वक्ताओं ने भारतीय कला जगत में महिलाओं की भूमिका, उनके योगदान, संघर्ष और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति के विकास में महिला कलाकारों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है और आज भी वे कला की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।

दिनभर चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शास्त्रीय एवं लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। कलाकारों ने भारतीय परंपरा और आधुनिक अभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। इसके साथ ही भोजपुरी पॉप, सुगम संगीत और ग़ज़ल की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में संगीत के विभिन्न रंग भर दिए। दर्शकों ने प्रत्येक प्रस्तुति का तालियों से स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं का परिचय दिया। किसी ने लोकसंगीत के माध्यम से ग्रामीण भारत की आत्मा को मंच पर जीवंत किया तो किसी ने शास्त्रीय संगीत और नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति की गहराई को प्रस्तुत किया। पूरे दिन सभागार कला प्रेमियों, विद्यार्थियों, रंगकर्मियों और संस्कृति से जुड़े लोगों से भरा रहा।

समापन समारोह में कला मंडली संस्था की ओर से आयोजन को सफल बनाने वाले सभी कलाकारों, सहयोगियों, तकनीकी टीम, स्वयंसेवकों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि “विविधा 2026” केवल एक सांस्कृतिक महोत्सव नहीं, बल्कि भारतीय कला, साहित्य, संगीत और रंगमंच को एक साझा मंच पर जोड़ने का प्रयास है। भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले कलाकारों एवं सहयोगियों का सम्मान भी किया गया। इस दौरान मीडिया की भूमिका की भी सराहना की गई। लोकतंत्र की शान हिंदी द डेली न्यूज़पेपर एवं LKSTV द्वारा पूरे महोत्सव की लगातार कवरेज को उपस्थित अतिथियों और आयोजकों ने सराहा।

चार दिनों तक चले इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय कला और संस्कृति आज भी समाज को जोड़ने की सबसे प्रभावशाली शक्ति है। श्रीराम सेंटर से शुरू होकर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय तक पहुंची “विविधा 2026” की यह सांस्कृतिक यात्रा कलाकारों और दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव बनकर समाप्त हुई। भारतीय शास्त्रीय परंपराओं, लोककलाओं, रंगमंच, साहित्य और संगीत के इस अद्भुत संगम ने राजधानी दिल्ली को कई दिनों तक सांस्कृतिक उत्सव के रंग में रंगे रखा।



📍 रिपोर्ट: सना खान

दिल्ली ब्यूरो चीफ

LKSTV न्यूज़रूम से प्रकाशित

यह समाचार “लोकतंत्र की शान हिंदी द डेली न्यूज़पेपर | LKSTV” के न्यूज़रूम से प्रकाशित किया गया है। कला, संस्कृति, समाज, राजनीति, शिक्षा और देश-दुनिया की विश्वसनीय एवं तथ्यपरक खबरों के लिए जुड़े रहें LKSTV के साथ।

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