Live Date Time

LOKTANTRA KI SHAN

Hindi NewsPaper

सिरसी में सबील-ए-हुसैन का एहतमाम, मुसाहिब हुसैन नकवी कम्बर अब्बास नकवी रहे पेश-पेश

संभल/सिरसी। मोहर्रमुल हराम के ग़मगीन माहौल में जहां पूरी दुनिया के अज़ादार शोहदाए कर्बला को ख़िराज-ए-अकीदत पेश कर रहे हैं, वहीं कस्बा सिरसी के इमामबाड़ा इमाम रज़ा (अ.स.) में नगर पंचायत प्रत्याशी मुसाहिब हुसैन नक़वी एवं उनके भाई, युवा समाजसेवी कम्बर अब्बास नक़वी की ओर से दूध की सबील का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में अज़ादारों, बुजुर्गों, युवाओं और राहगीरों ने सबील से तबर्रुक हासिल किया।

मोहर्रम के दिनों में लगाई जाने वाली सबीलें कर्बला के उस अज़ीम पैग़ाम की याद दिलाती हैं, जब इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफ़ादार साथियों ने दीन-ए-इस्लाम और इंसानियत की हिफ़ाज़त के लिए अपनी जानों की कुर्बानी पेश कर दी थी। उन्हीं कुर्बानियों की याद में मुसाहिब हुसैन नक़वी और कम्बर अब्बास नक़वी ने अज़ादारों की खिदमत को अपना फ़र्ज़ समझते हुए सबील का आयोजन किया।

सबील पर दिनभर अज़ादारों का आना-जाना लगा रहा। दोनों भाइयों ने स्वयं मौजूद रहकर लोगों का इस्तक़बाल किया और खिदमत-ए-अज़ादार का फ़र्ज़ निभाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) की ज़िंदगी हमें इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे, सब्र और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने का सबक देती है। मोहर्रम केवल ग़म मनाने का महीना नहीं, बल्कि इंसानियत और खिदमत का पैग़ाम आम करने का भी महीना है।

क्षेत्र के गणमान्य लोगों एवं अज़ादारों ने नक़वी बंधुओं की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मुसाहिब हुसैन नक़वी और कम्बर अब्बास नक़वी हमेशा सामाजिक, धार्मिक और जनहित के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। मोहर्रम के पवित्र दिनों में अज़ादारों के लिए दूध की सबील लगाकर उन्होंने अहलेबैत (अ.स.) से अपनी मोहब्बत और अकीदत का खूबसूरत इज़हार किया है।

कार्यक्रम के दौरान इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला की कुर्बानियों को याद किया गया तथा उनकी शिक्षाओं को समाज तक पहुंचाने पर ज़ोर दिया गया। सबील पर मौजूद लोगों ने आयोजनकर्ताओं के लिए दुआएं कीं और इस नेक कार्य को समाज में भाईचारे, मोहब्बत और इंसानियत को मज़बूत करने वाला कदम बताया।

मोहर्रम के इन ग़मगीन दिनों में इमामबाड़ा इमाम रज़ा (अ.स.) में आयोजित यह सबील-ए-हुसैन न सिर्फ़ अज़ादारों की खिदमत का ज़रिया बनी, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) के पैग़ाम-ए-इंसानियत को आम करने का भी बेहतरीन माध्यम साबित हुई।


 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *