Pawan Khera ने पश्चिम बंगाल की कई विधानसभा सीटों को लेकर बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित रखा गया और जिन सीटों पर यह मामला सामने आया, वहां जीत का अंतर कथित “SIR डिलीशन” की संख्या से भी कम रहा।
कांग्रेस का कहना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और लोकतंत्र की मूल भावना प्रभावित हुई है। पार्टी ने मांग की है कि जिन सीटों पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और वोटिंग अधिकार से वंचित किए जाने के आरोप लगे हैं, वहां दोबारा मतदान कराया जाना चाहिए।
पवन खेड़ा ने क्या कहा?
कांग्रेस के AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा:
“पश्चिम बंगाल में जिन मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित रखा गया, उन सीटों पर जीत का मार्जिन SIR डिलीशन की संख्या से कम है। यानी सबकुछ सामने है — दूध का दूध और पानी का पानी। ऐसे में हमें लगता है कि उन सीटों पर दोबारा मतदान होना चाहिए, क्योंकि इनमें से बहुत से लोग अभी भी वोट के अधिकार का इंतजार कर रहे हैं। हमें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है कि वो संविधान को ध्यान में रखते हुए न्याय करेंगे।”
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस और विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए या उन्हें मतदान से रोका गया। पार्टी का दावा है कि जिन सीटों पर चुनावी मुकाबला बेहद करीबी रहा, वहां हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक या उसके बराबर थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे चुनाव परिणामों की वैधता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि विपक्ष अब चुनाव आयोग और न्यायपालिका दोनों से हस्तक्षेप की मांग कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद
कांग्रेस ने साफ कहा है कि उसे Supreme Court of India पर पूरा भरोसा है। पार्टी का मानना है कि संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत उचित फैसला करेगी।
राजनीतिक हलकों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या चुनाव आयोग इस मामले में दोबारा जांच करेगा या फिर मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा।
चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव
इस बयान के बाद चुनाव आयोग पर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। विपक्ष लगातार मतदाता सूची में गड़बड़ी, नाम हटाने और चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है। हालांकि अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इस विशेष आरोप पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक माहौल गरम
पश्चिम बंगाल की राजनीति पहले से ही काफी गरम रही है और अब वोटर डिलीशन के मुद्दे ने राजनीतिक माहौल को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है, खासकर तब जब विपक्ष लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव को लेकर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग को घेरने की तैयारी में है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करती है, तो यह आने वाले चुनावों के लिए भी एक बड़ा संवैधानिक उदाहरण बन सकता है।
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