नई दिल्ली:- दैनिक समाचार पत्र ” लोकतंत्र की शान” दिल्ली ब्यूरो चीफ —— ” सना खान ”
दिल्ली की राजनीति से एक बेहद भावुक और दुखद खबर सामने आई है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के पिता प्रोफेसर विजय सिंह का हाल ही में निधन हो गया। इस घटना ने न केवल उनके परिवार बल्कि राजनीतिक गलियारों को भी शोक में डुबो दिया है।
कब और कैसे हुआ निधन।
मिली जानकारी के अनुसार, आतिशी के पिता प्रो. विजय सिंह का निधन शुक्रवार को हुआ। बताया जा रहा है कि वे पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी और अंततः उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनका अंतिम संस्कार शनिवार को दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट पर किया गया, जहां बड़ी संख्या में राजनीतिक नेता, शिक्षाविद और आम लोग मौजूद रहे।
कौन थे प्रो. विजय सिंह।

प्रो. विजय सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के जाने-माने प्रोफेसर थे। वे शिक्षा जगत में एक सम्मानित नाम थे और छात्रों व शिक्षकों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा और समाज सेवा को समर्पित किया।
उनके निधन से शिक्षा जगत को भी बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़।
अंतिम संस्कार के दौरान कई बड़े नेता मौजूद रहे, जिनमें दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे।
हर किसी ने आतिशी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
क्यों रेखा गुप्ता के गले लगकर रो पड़ीं आतिशी।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे भावुक पल तब सामने आया, जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शोक व्यक्त करने के लिए पहुंचीं। जैसे ही उन्होंने आतिशी को गले लगाया, आतिशी खुद को संभाल नहीं पाईं और फूट-फूट कर रोने लगीं।
दरअसल, पिता का निधन किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद बड़ा भावनात्मक आघात होता है। ऐसे समय में जब कोई करीबी या सहानुभूति जताने वाला व्यक्ति सामने आता है, तो भावनाएं और ज्यादा उमड़ पड़ती हैं। यही कारण था कि आतिशी, जो आमतौर पर मजबूत और संयमित छवि के लिए जानी जाती हैं, इस दुख की घड़ी में टूट गईं।
वीडियो और तस्वीरों में साफ देखा गया कि रेखा गुप्ता उन्हें सांत्वना दे रही थीं और दोनों के बीच का यह भावुक पल सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया।
राजनीति से ऊपर इंसानियत।

इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि राजनीति से ऊपर इंसानियत होती है। भले ही अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता हों, लेकिन दुख की घड़ी में सभी एक साथ खड़े नजर आए।
रेखा गुप्ता और अरविंद केजरीवाल दोनों ही अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से आते हैं, लेकिन इस मौके पर उन्होंने मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दी और आतिशी के परिवार को सहारा दिया।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रो. विजय सिंह पिछले 3-4 महीनों से बीमार थे और उनका जाना बेहद दुखद है।
कई नेताओं ने उन्हें एक महान शिक्षाविद और सरल स्वभाव का इंसान बताया।
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा कि पार्टी एक परिवार की तरह है और इस दुख की घड़ी में सभी आतिशी के साथ खड़े हैं।
जनता और समर्थकों में भी शोक।

सिर्फ राजनीतिक गलियारों में ही नहीं, बल्कि आम जनता और छात्रों के बीच भी शोक की लहर है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।
आतिशी के पिता का निधन एक निजी क्षति जरूर है, लेकिन इसका असर सार्वजनिक जीवन में भी साफ दिखाई दिया। यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि चाहे कोई कितना भी मजबूत क्यों न दिखे, परिवार के दुख के सामने हर व्यक्ति भावुक हो जाता है।
रेखा गुप्ता के गले लगकर आतिशी का रोना सिर्फ एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि यह उस गहरे दर्द का प्रतीक था जो एक बेटी अपने पिता को खोने पर महसूस करती है।
इस दुखद मौके पर पूरा देश आतिशी और उनके परिवार के साथ खड़ा है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहा है।
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