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NCERT पर विवाद: क्या वाकई नाराज हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी? क्या रहा पूरा मामला….

नई दिल्ली।

हाल के वर्षों में एनसीईआरटी (NCERT) National Council of Educational Research and Training की किताबों में किए गए बदलावों को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज रही। विपक्षी दलों ने इसे “इतिहास में बदलाव” बताया, जबकि केंद्र सरकार ने इसे सिलेबस के “रैशनलाइजेशन” की प्रक्रिया का हिस्सा कहा। इस पूरे विवाद के बीच सवाल उठता रहा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Narendra Modi एनसीईआरटी से नाराज़ हुए थे और क्या कोई सख्त कार्रवाई की गई?

क्या था पूरा मामला?

कोविड-19 महामारी के बाद शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के लिए सिलेबस में कटौती की बात कही। इसी क्रम में NCERT की इतिहास, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र की किताबों से कुछ अध्याय या हिस्से हटाए गए।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

मुगल काल से जुड़े कुछ पाठ

महात्मा गांधी Mahatma Gandhi की हत्या से संबंधित कुछ विवरण

2002 के गुजरात दंगों का उल्लेख

लोकतंत्र और असहमति (Dissent) पर कुछ अंश

इन परिवर्तनों के बाद विपक्षी दलों और कई शिक्षाविदों ने आरोप लगाया कि इतिहास को “एक खास दृष्टिकोण” से प्रस्तुत किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा ट्रेंड करता रहा।

सरकार का पक्ष…

केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय का कहना था कि यह कदम पूरी तरह शैक्षणिक कारणों से उठाया गया। उनका तर्क था:

कोविड के बाद छात्रों पर अतिरिक्त बोझ कम करना जरूरी था।

कुछ विषयों में दोहराव (repetition) था, जिसे हटाया गया।

सिलेबस को अधिक प्रासंगिक और व्यावहारिक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई “इतिहास बदलने” की कोशिश नहीं, बल्कि पाठ्यक्रम को संतुलित और आधुनिक बनाने का प्रयास है।

क्या प्रधानमंत्री मोदी नाराज़ हुए?

अब तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से NCERT पर नाराज़गी जताई हो। यह प्रक्रिया शिक्षा मंत्रालय और संबंधित शैक्षणिक निकायों के माध्यम से संचालित की गई।

हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की वकालत करते रहे हैं। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) National Education Policy 2020 लागू की गई, जिसमें शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, कौशल-आधारित और भारतीय परंपराओं से जुड़ा बनाने की बात कही गई।

नई शिक्षा नीति का प्रभाव…

NEP 2020 के तहत:

10+2 प्रणाली को बदलकर 5+3+3+4 ढांचा लागू किया गया।

मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा पर जोर दिया गया।

स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा दिया गया।

पाठ्यक्रम को कम बोझिल बनाने की दिशा में काम शुरू हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि NCERT में किए गए बदलाव भी इसी व्यापक शिक्षा सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया…

विपक्ष ने संसद और विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे को उठाया। कुछ नेताओं ने इसे “इतिहास के साथ छेड़छाड़” बताया, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यक्रम में बदलाव एक सामान्य प्रक्रिया है, जो समय-समय पर होती रहती है। हालांकि, पारदर्शिता और व्यापक चर्चा से ऐसे विवादों को कम किया जा सकता है।

NCERT की किताबों में बदलाव को लेकर देश में बहस जरूर हुई, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सीधे तौर पर किसी नाराज़गी या दंडात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। यह कदम शिक्षा मंत्रालय की नीति और NEP 2020 के तहत किए जा रहे व्यापक सुधारों का हिस्सा बताया गया।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई शिक्षा नीति और सिलेबस सुधार का छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।

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