कमिश्नर रीवा संभाग द्वारा जारी हुआ आदेश, बाल कल्याण समिति की जांच में आरोपों की पुष्टि रीवा संभाग के कमिश्नर द्वारा शासकीय माध्यमिक विद्यालय मधुरी, जिला सीधी के प्रधानाध्यापक रामसहाय साकेत को दिव्यांग छात्र से कथित दुर्व्यवहार एवं कदाचार के गंभीर प्रकरण में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जिला प्रशासन एवं बाल कल्याण समिति द्वारा की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत संचालित सी.डब्ल्यू.एस.एन. छात्रावास, मधुरी में अध्ययनरत कक्षा 8 के एक दिव्यांग छात्र के साथ मारपीट एवं अपमानजनक व्यवहार किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में यह उल्लेख किया गया था कि छात्र के साथ शारीरिक एवं मानसिक रूप से अनुचित व्यवहार किया गया, जिससे छात्र भयभीत एवं मानसिक रूप से आहत हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा प्रकरण की जांच जिला बाल कल्याण समिति, सीधी से कराई गई।
बाल कल्याण समिति द्वारा किए गए निरीक्षण, छात्र एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के कथनों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण उपरांत प्रस्तुत प्रतिवेदन में यह पाया गया कि दिव्यांग छात्र के साथ अनुचित व्यवहार किया गया है। समिति ने इसे गंभीर प्रकृति का प्रकरण मानते हुए संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा की थी।
जांच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद कमिश्नर, रीवा संभाग द्वारा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत उक्त प्रधानाध्यापक को निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों, विशेषकर दिव्यांग बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न पूर्णतः प्रतिबंधित है तथा ऐसे कृत्य गंभीर कदाचार की श्रेणी में आते हैं।
निलंबन अवधि के दौरान श्री साकेत का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, जिला सीधी कार्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। साथ ही प्रकरण में विभागीय जांच की आगामी कार्यवाही नियमानुसार की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा दिव्यांग विद्यार्थियों के अधिकारों की सुरक्षा एवं सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने हेतु समय-समय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों एवं छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस प्रकार की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन, उत्तरदायित्व एवं बाल-अधिकारों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।