मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा बदलाव तब देखने को मिला जब ईरान में नए सुप्रीम लीडर के रूप में Mojtaba Khamenei का नाम सामने आया।
लंबे समय तक देश का नेतृत्व करने वाले Ali Khamenei के बाद यह जिम्मेदारी उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को दी गई है। इस फैसले ने ईरान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति में चर्चा तेज कर दी है।
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद देश का सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है।
राष्ट्रपति और सरकार के ऊपर भी अंतिम निर्णय सुप्रीम लीडर का ही होता है। इसलिए नए सुप्रीम लीडर का चयन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कौन हैं मुजतबा खामेनेई…
मुजतबा खामेनेई का जन्म 8 सितंबर 1969 को ईरान के मशहद शहर में हुआ था। वे ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बेटे हैं। बचपन से ही उनका पालन-पोषण एक धार्मिक और राजनीतिक माहौल में हुआ।
उन्होंने ईरान के प्रसिद्ध धार्मिक शहर क़ुम में इस्लामी शिक्षा प्राप्त की। क़ुम शिया इस्लामी विद्वानों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहीं से उन्होंने धार्मिक अध्ययन कर खुद को एक इस्लामी विद्वान के रूप में स्थापित किया।
हालांकि वे सार्वजनिक राजनीति में कम दिखाई देते थे, लेकिन ईरान की सत्ता व्यवस्था में उनका प्रभाव लंबे समय से माना जाता रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि वे अपने पिता के शासनकाल में पर्दे के पीछे से कई अहम फैसलों में भूमिका निभाते रहे।
कैसे बने ईरान के सुप्रीम लीडर..
ईरान में सुप्रीम लीडर का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता। इसके लिए एक विशेष धार्मिक संस्था होती है जिसे Assembly of Experts कहा जाता है।
इस परिषद में इस्लामी विद्वान और धार्मिक नेता शामिल होते हैं, जो देश के सर्वोच्च नेता का चयन करते हैं। अली खामेनेई के लंबे कार्यकाल के बाद जब नया नेतृत्व चुनने की प्रक्रिया शुरू हुई तो कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन अंततः मुजतबा खामेनेई को यह जिम्मेदारी दी गई।
यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार ईरान में सुप्रीम लीडर का पद पिता से बेटे को मिला है। इससे पहले ईरान में यह पद वंशानुगत तरीके से नहीं मिला था।
सुप्रीम लीडर की ताकत और अधिकार..
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यह पद देश के राष्ट्रपति से भी अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
सुप्रीम लीडर के पास कई महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं, जिनमें शामिल हैं:
* देश की सेना और सुरक्षा एजेंसियों का सर्वोच्च नियंत्रण
* विदेश नीति और रक्षा नीति पर अंतिम निर्णय
* न्यायपालिका के प्रमुख की नियुक्ति
* सरकारी मीडिया संस्थानों पर प्रभाव
* राष्ट्रपति के बड़े फैसलों को मंजूरी देना
इसके अलावा ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps भी सीधे सुप्रीम लीडर के अधीन होती है। यह संस्था ईरान की सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति में बेहद अहम भूमिका निभाती है।
*पहले क्या करते थे मुजतबा खामेनेई*
सुप्रीम लीडर बनने से पहले मुजतबा खामेनेई औपचारिक रूप से सरकार में किसी बड़े पद पर नहीं थे, लेकिन उन्हें सत्ता के बेहद करीब माना जाता था।
वे अपने पिता के कार्यालय में सलाहकार के रूप में सक्रिय थे और कई राजनीतिक व सुरक्षा मामलों में उनकी भूमिका बताई जाती रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की स्वयंसेवी सैन्य इकाई बसिज और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कुछ वर्गों में उनका प्रभाव माना जाता है। इसी वजह से उन्हें सत्ता के लिए एक मजबूत उम्मीदवार समझा जाता था।
*अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर*
मुजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। पश्चिमी देशों और मध्य पूर्व के कई देशों की नजर अब ईरान की नई नीतियों पर टिकी हुई है।
ईरान पहले से ही अमेरिका और इज़राइल के साथ तनावपूर्ण संबंधों के लिए जाना जाता है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए सुप्रीम लीडर इन संबंधों को किस दिशा में ले जाते हैं।
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुजतबा खामेनेई अपने पिता की नीतियों को ही आगे बढ़ा सकते हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि वे क्षेत्रीय राजनीति में नई रणनीति भी अपना सकते हैं।
*ईरान की राजनीतिक व्यवस्था*
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था दुनिया के कई देशों से अलग है। यहां लोकतांत्रिक चुनाव भी होते हैं और धार्मिक नेतृत्व भी मजबूत है।
देश में राष्ट्रपति का चुनाव जनता द्वारा किया जाता है, लेकिन सुप्रीम लीडर के पास अंतिम शक्ति होती है। यही कारण है कि सुप्रीम लीडर को ईरान की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति माना जाता है।
मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व में अब ईरान किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
*भविष्य की चुनौतियाँ*
नए सुप्रीम लीडर के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ भी हैं। इनमें देश की आर्थिक स्थिति, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, क्षेत्रीय संघर्ष और आंतरिक राजनीतिक संतुलन शामिल हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच मुजतबा खामेनेई की नीतियां ईरान की भविष्य की दिशा तय करेंगी।
दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि ईरान का नया नेतृत्व किस तरह देश की विदेश नीति, सुरक्षा रणनीति और घरेलू राजनीति को आगे बढ़ाता है।

